शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमिताभ बच्चन को निर्देश दिया कि अगर वह अपने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मामले को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा।
9 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान, जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव की सिंगल-जज बेंच ने साफ़ किया कि अगर वादी (अमिताभ बच्चन) एक या ज़्यादा प्रतिवादियों (जिन पर केस किया गया है) के साथ मामला सुलझा नहीं पाते हैं और फिर भी केस आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें कोर्ट के सामने पेश होना होगा।
कोर्ट ने यह निर्देश जारी किया और एक्टर को कुछ प्रतिवादियों के साथ हुए आपसी समझौते की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए समय दिया। मामले में कोर्ट को बताया गया कि हालांकि कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौता हो सकता है, लेकिन एक्टर की तरफ से कुछ लॉजिस्टिकल दिक्कतों (कामकाजी मुश्किलों) के कारण इसे औपचारिक रूप से साइन नहीं किया जा सका है।
कोर्ट के सशर्त आदेश में साफ़ तौर पर लिखा है:
“अगर समझौता नहीं होता है या समझौता अधूरा रहता है, और वादी किसी भी दावे या मुद्दे पर केस आगे बढ़ाना चाहता है, तो वादी को सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना होगा। इससे कोर्ट ‘कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908’ के ‘ऑर्डर X रूल 2’ और ‘ऑर्डर V रूल 3’ तथा ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेगी।”
अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स केस के बारे में
‘कौन बनेगा करोड़पति’ के होस्ट ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए स्थायी रोक (परमानेंट इंजेक्शन) की मांग करते हुए केस दायर किया था। हाई कोर्ट ने 25 नवंबर 2022 को उनके पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक (एक्स-पार्टे इंटेरिम इंजेक्शन) का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों ने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की संभावना पर विचार किया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई 16 नवंबर 2026 तक के लिए टाल दी है।
9 अक्टूबर को कोर्ट को बताया गया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौता हो गया है, लेकिन अभी भी औपचारिक समझौते का इंतज़ार है।
अमिताभ का पक्ष वकील ध्रुव आनंद, धनंजय खन्ना और भव्य वर्मा ने रखा।
