अरविंद त्रिवेदी, परेश रावल के मशहूर गुजराती नाटक ‘महारथी’ में काम कर रहे थे। इसलिए, जब उन्हें रावण का रोल करने का मौका मिला, तो उन्होंने रावल से पूछा कि क्या उन्हें यह रोल करना चाहिए, क्योंकि वे पहले से ही ‘महारथी’ में व्यस्त थे।
त्रिवेदी पहले से ही एक जाने-माने और बहुत सम्मानित एक्टर थे। रावल के मुताबिक, त्रिवेदी का बड़प्पन था कि उन्होंने खुद आकर इस मौके के बारे में उनसे बात की। रावल उनके इस व्यवहार से बहुत प्रभावित हुए।
रावल ने त्रिवेदी से कहा, “अगर मैं आपको यह करने से रोकूँ, तो यह पाप होगा। आपको ज़रूर यह रोल करना चाहिए। अगर मेरी जगह कोई और मेरा रोल कर ले, तो कोई बात नहीं। रावण जैसा रोल बार-बार नहीं मिलता। आप जैसे काबिल एक्टर को ऐसा रोल मिलना ही चाहिए।”
रावल को यह मौका किसी दैवीय इच्छा जैसा लगा। उन्होंने खुद को बस एक ज़रिया माना, जैसे भगवान उनसे कोई अच्छा काम करवाना चाहते हों और उन्होंने उन्हें ही इसके लिए चुना हो। उन्होंने कहा, “शायद भगवान मेरे हाथों से कुछ अच्छा काम करवाना चाहते थे, तो मैं बस एक ज़रिया था, और कुछ नहीं।”
