भारत के मशहूर क्रिकेटर विराट कोहली आज, 5 नवंबर 2026 को 38 साल के हो गए हैं। वे क्रिकेट की दुनिया में सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक के रूप में अपनी विरासत को और मजबूत कर रहे हैं। लेकिन रिकॉर्ड तोड़ने से कहीं आगे, उनका करियर उनके व्यक्तिगत विकास को दर्शाता है: एक बेहद आक्रामक और जोशीले क्रिकेटर से—जो कभी मज़ाक में कहते थे, “क्या मैं पूजा-पाठ करने वाला इंसान लगता हूँ?”—वे अब एक गहरे आध्यात्मिक साधक बन गए हैं।
अनुष्का शर्मा का प्रभाव
विराट ने खुद माना है कि शुरुआत में उनका आस्था में विश्वास नहीं था; वे केवल अपनी कड़ी मेहनत और मैदान पर अपने आक्रामक तेवर पर भरोसा करते थे। हालाँकि, बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा से शादी के बाद उनके नज़रिए में एक बड़ा बदलाव आया। उनके जीवन में अनुष्का के आने से एक नया अध्याय शुरू हुआ, जिसने उन्हें एक नई विचारधारा से परिचित कराया और उन्हें मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक गहराई की ओर प्रेरित किया।
परमहंस योगानंद की क्लासिक किताब ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी’ (एक योगी की आत्मकथा) पढ़ने से विराट को ‘माइंडफुलनेस’ (सचेतनता) और बिना किसी चिंता के अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा मिली। इसके अलावा, वृंदावन में प्रेमानंद जी महाराज के प्रवचन सुनने और नीम करौली बाबा के आश्रम जाने से, शोहरत, लोगों और आज के दौर के दबावों को देखने के उनके नज़रिए में एक बुनियादी बदलाव आया।
एक आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में उनका यह बदलाव उनके व्यवहार में भी झलकता है। युवा विराट कोहली दबाव वाले मैचों के दौरान अपने आक्रामक और तीखे भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के लिए जाने जाते थे। आज, उनके स्वभाव में शांति, धैर्य और गहरी सजगता देखने को मिलती है। वे अब भजन-कीर्तन में भी रुचि लेने लगे हैं; धार्मिक स्थलों पर जाना और ऐसी शांतिपूर्ण गतिविधियों में शामिल होना, जो उन्हें ईश्वर से जोड़ती हैं, अब उनके जीवन का हिस्सा बन गया है।
मैदान पर अपने प्रदर्शन से लेकर अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण तक, विराट पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल गए हैं। यह बदलाव उनकी आध्यात्मिक राह चुनने के फैसले को दर्शाता है और इसी ने उन्हें आज का इंसान बनाया है।
