हाल ही में रिलीज़ हुए ‘द इंडिया स्टोरी’ के पोस्टर में श्रेयस तलपड़े अपनी कैंसर पीड़ित बेटी को गोद में उठाए भावुक अंदाज़ में नज़र आए, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह फिल्म देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी गंभीर समस्या और उसके आम लोगों के जीवन पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव को उजागर करती है। साथ ही, इसकी भावनात्मक कहानी एक ऐसे पिता के संघर्ष को भी सामने लाती है, जो कैंसर से जूझ रही अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश करता है। पिता-बेटी के अटूट प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास को बेहद संवेदनशीलता के साथ पेश करती यह फिल्म चेतन डीके के निर्देशन में बनी है और 24 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।
गौरतलब है कि ‘द इंडिया स्टोरी’ की तरह बॉलीवुड ने भी कई ऐसी यादगार फिल्में दी हैं, जिन्होंने पिता-बेटी के रिश्ते को बेहद संवेदनशील और खूबसूरत अंदाज़ में पर्दे पर पेश किया है। तो आइए एक नज़र डालते हैं उन 7 हिंदी फिल्मों पर, जिन्होंने अपने प्यार, त्याग, मार्गदर्शन और दोस्ती से भरे इन रिश्तों से दर्शकों का दिल छू लिया।
पिकू (2015)
पिता: अमिताभ बच्चन
बेटी: दीपिका पादुकोण

पिता-बेटी के रिश्ते को जितनी सहजता और वास्तविकता के साथ ‘पिकू’ में दिखाया गया है, वैसा कम ही फिल्मों में देखने को मिलता है। पिकू बनर्जी और उनके बुज़ुर्ग पिता भास्कर के बीच होने वाली नोकझोंक, अलग-अलग विचार और रोज़मर्रा की बहसों के बावजूद दोनों के बीच गहरा प्यार और एक-दूसरे पर निर्भरता इस रिश्ते को बेहद भावुक और वास्तविक बनाती है।
द इंडिया स्टोरी (2026)
पिता: श्रेयस तलपड़े
बेटी: तृषा

‘द इंडिया स्टोरी’ खाद्य पदार्थों में मिलावट और उससे जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की पृष्ठभूमि में एक मार्मिक पिता-बेटी के रिश्ते को दर्शाती है। सामाजिक मुद्दे को उठाने के साथ-साथ फिल्म का भावनात्मक केंद्र उस पिता और बेटी का रिश्ता है, जो हर मुश्किल का सामना एक-दूसरे का साथ देकर करते हैं।
गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल (2020)
पिता: पंकज त्रिपाठी
बेटी: जाह्नवी कपूर

इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत एक ऐसे पिता का किरदार है, जो अपनी बेटी के सपनों पर पूरा भरोसा करता है। अनुप सक्सेना अपनी बेटी गुंजन को समाज की बाधाओं के बावजूद पायलट बनने के लिए प्रेरित करते हैं और साबित करते हैं कि माता-पिता का विश्वास बच्चों की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
दंगल (2016)
पिता: आमिर खान
बेटियां: फातिमा सना शेख और सान्या मल्होत्रा

‘दंगल’, पहलवान महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों गीता व बबीता की प्रेरणादायक कहानी है। अनुशासन, कड़ी मेहनत और त्याग के जरिए एक पिता अपनी बेटियों को समाज की रूढ़ियों को तोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए तैयार करता है।
हे बेबी (2007)
पिता: अक्षय कुमार
बेटी: एंजेल

मुख्य रूप से एक कॉमेडी फिल्म होने के बावजूद ‘हे बेबी’ पिता बनने की ज़िम्मेदारी और भावनाओं को बेहद खूबसूरती से पेश करती है। जब आरुष को एक छोटी बच्ची की देखभाल करनी पड़ती है, तो उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाती है और वह प्यार, ज़िम्मेदारी और निस्वार्थ स्नेह का असली मतलब समझता है।
अंग्रेज़ी मीडियम (2020)
पिता: इरफ़ान खान
बेटी: राधिका मदान

चंपक बंसल एक ऐसे समर्पित पिता हैं, जो अपनी बेटी के विदेश में पढ़ाई करने के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। फिल्म एक पिता के त्याग, संघर्ष और बेटी के प्रति उसके असीम प्रेम को बेहद भावुक तरीके से दर्शाती है।
दृश्यम (2015)
पिता: अजय देवगन
बेटियां: इशिता दत्ता और मृणाल जाधव

हालांकि ‘दृश्यम’ एक सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म है, लेकिन इसकी असली भावनात्मक ताकत विजय सालगांवकर का अपनी बेटियों के प्रति अटूट समर्पण है। वह अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए हर हद पार करने को तैयार रहता है, जो यह दर्शाता है कि एक पिता अपने बच्चों की रक्षा के लिए किस हद तक जा सकता है।
